श्री देवकीनन्दन ठाकुर जी

श्री देवकीनन्दन ठाकुर जी महाराज का जन्म 12 सितंबर 1978 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के छाता क्षेत्र स्थित ओहावा गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम श्री राजवीर शर्मा और माता का नाम श्रीमती अनसुइया देवी है। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े देवकीनन्दन जी को बचपन से ही ब्रज की महत्ता और श्रीकृष्ण भगवान की लोककथाओं का ज्ञान अपने माता-पिता से सुनते हुए प्राप्त हुआ।

छह वर्ष की आयु में घर से वृंदावन

मात्र छह वर्ष की छोटी आयु में देवकीनन्दन ठाकुर जी घर छोड़कर वृंदावन पहुँच गए और वहाँ ब्रज की रासलीला संस्था से जुड़कर लीला-मंचन में भाग लेने लगे। यह असामान्य रूप से प्रारंभिक निर्णय उनके संपूर्ण जीवन की दिशा तय करने वाला सिद्ध हुआ।

1997 से निरंतर कथा-वाचन

वर्ष 1997 से महाराज श्री श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा, देवी भागवत, शिवपुराण कथा और भगवद्गीता जैसे ग्रंथों पर निरंतर प्रवचन देते आ रहे हैं। उनकी कथाओं में लाखों की संख्या में श्रद्धालु जनसैलाब के रूप में उमड़ते हैं, और आज वे यूट्यूब, टेलीविज़न चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुँच बना चुके हैं।

धर्मरक्षक और समाज सुधारक की भूमिका

देवकीनन्दन ठाकुर जी केवल एक कथावाचक ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध मुखर आवाज़ भी माने जाते हैं। उन्होंने वर्ल्ड पीस मिशन तथा श्री कृष्णा क्रांति सेना जैसी संस्थाओं की स्थापना की और गौसेवा तथा राष्ट्रभक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। वर्ष 2015 में उन्हें "यूपी रत्न" पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो उनके व्यापक सामाजिक एवं धार्मिक योगदान की मान्यता है।

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