श्री हित अम्बरीश जी

श्री हित अम्बरीश जी राधावल्लभ सम्प्रदाय के अंतर्गत आने वाले एक युवा आध्यात्मिक शिक्षक हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण हरियाणा के हिसार में हुआ, और यहीं से उनकी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत हुई। शिक्षा और प्रशिक्षण पूर्ण करने के पश्चात उन्होंने देशभर के विभिन्न स्थानों पर अपने ज्ञान और अनुभव को श्रद्धालुओं के साथ साझा करना आरंभ किया।

हित हरिवंश महाप्रभु की परंपरा के अनुयायी

राधावल्लभ सम्प्रदाय की स्थापना सोलहवीं शताब्दी में गोस्वामी हित हरिवंश महाप्रभु ने की थी, जिन्होंने सन् 1525 में वृंदावन में श्री राधावल्लभ जी की मूर्ति स्थापित की और स्वयं विरक्त भाव से वहीं निवास करने लगे। हित हरिवंश जी को ही राधावल्लभ सम्प्रदाय में अष्टयाम सेवा — दिन के आठों प्रहरों में भगवान की सेवा की पद्धति — का श्रेय दिया जाता है। श्री हित अम्बरीश जी आचार्य हित हरिवंश जी के इसी पदचिन्हों पर चलते हुए श्रीराधा के चरणों में अपने वात्सल्य और प्रेम को अपने प्रवचनों में प्रकट करते हैं।

सेवा को प्रेम की सर्वोच्च अभिव्यक्ति मानना

श्री हित अम्बरीश जी अपने प्रवचनों में बार-बार यह सिखाते हैं कि सेवा का प्रदर्शन ही आदिशक्ति परमपिता परमात्मा के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। उनकी वाणी की मधुरता और अनुभव-आधारित शैली ने कई लोगों का जीवन बदला है, और उन्हें प्रेम, भक्ति और निःस्वार्थ सेवा से परिपूर्ण मार्ग दिखाने वाले प्रेरणादायक गुरु के रूप में जाना जाता है।

वर्तमान में वृंदावन-स्थित एक प्रमुख जीवन-कोच और सलाहकार

आज श्री हित अम्बरीश जी वृंदावन में स्थित होकर एक प्रमुख जीवन-कोच और आध्यात्मिक सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं, जो पारंपरिक राधावल्लभ भक्ति-भाव को आज के युवाओं के लिए सुगम और प्रासंगिक बनाकर प्रस्तुत करते हैं।

श्री हित अम्बरीश जी को होमपेज पर देखें →
← वृंदावन के सभी संत Home →