श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी

श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी का जन्म 20 जुलाई 1988 को उत्तर प्रदेश के वृंदावन नगर में श्री भूति कृष्ण गोस्वामी और सुकृति गोस्वामी के घर हुआ। वे वृंदावन के छह गोस्वामियों में से एक, श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी जी के वंशज हैं, जिन्होंने चैतन्य महाप्रभु से प्रेरित होकर सन् 1542 में वृंदावन में राधा रमण मंदिर की स्थापना की थी।

एक वैष्णव परिवार में पला-बढ़ा बचपन

पुण्डरीक गोस्वामी जी अपने प्रसिद्ध पूर्वज संत श्री अतुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के पौत्र हैं। उनका पूरा परिवार आध्यात्म से गहराई से जुड़ा हुआ है, इसलिए उनका बचपन भक्ति भाव में ही बीता। मात्र सात वर्ष की आयु से ही उन्होंने भगवद्गीता पर प्रवचन देना आरंभ कर दिया था — एक ऐसी प्रारंभिक शुरुआत जो उनके परिवार की पीढ़ियों पुरानी भक्ति परंपरा का स्वाभाविक विस्तार थी।

आधुनिक शिक्षा से भक्ति मार्ग तक

पुण्डरीक गोस्वामी जी की जीवन-यात्रा में एक विशेष मोड़ तब आया जब उन्होंने विदेश में उच्च शिक्षा का अवसर छोड़कर पूर्णतः भक्ति मार्ग को अपनाने का निर्णय लिया — एक ऐसा चयन जो उनकी गहरी आध्यात्मिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि यह निर्णय उन्होंने आधुनिक शैक्षणिक अवसरों को त्यागकर लिया।

श्रीमद्भागवतम् और चैतन्य चरितामृत के प्रवचनकर्ता

आज श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी श्रीमद्भागवतम्, चैतन्य चरितामृत, रामकथा और भगवद्गीता पर अपने सुललित एवं गहन प्रवचनों के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रवचन मुख्यतः श्रीकृष्ण की लीलाओं के इर्द-गिर्द केंद्रित होते हैं, और वे अपने पारिवारिक गोस्वामी लीनेज की विरासत को आधुनिक श्रोताओं तक सुगमता से पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं।

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